पानी की कहानी
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पानी की कहानी - स्वस्थ नदियां : पारिस्थितिक समृधि एवं विकास की द्योतक

  • By
  • Rakesh Prasad
  • August-10-2018

जल जीवन, पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं का प्रदाता है और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के कार्यान्वयनकर्ता के रूप में देखा जाता है. यह प्रकृति का एक आवश्यक घटक है, साथ ही आर्थिक विकास के लिए प्राथमिक  संसाधन, अधिक ऊर्जा और भोजन प्रदान करता है, जिससे गरीबी में कमी आती है और समाज में शांति व समृद्धि का आगमन होता है. नदी- जल पर निर्भर रहने वालों के लिए नदियाँ जीवन रेखा हैं, जो उनकी आजीविका की देखभाल करती हैं और गैर-उपयोग वाले जल के द्वारा आय उत्पादन होता है. निरंतर प्रवाहित नदियां बहुत सी संस्कृतियों, पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों के लिए अथाह शांति, आध्यात्मिकता, “मोक्ष” व प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक हैं. एक पवित्र डुबकी या गंगा-जल आचमन अनगिनत परम्पराओं में अंतिम इच्छा मानी जाती है.

जल
जीवन, पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं का प्रदाता है और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के
कार्यान्वयनकर्ता के र

 

वर्तमान में नदियों की आत्म अनुकूलन क्षमता एवं प्रवाह में लगातार कमी आ रही है. नदी के किनारे भारी मात्रा में गाद से भर दिए गये हैं, जिस कारण बाढ़ झेलने की नदियों की कुदरती क्षमता घट गयी है. तटीय इलाकों में खेती, रसायनों का उपयोग, असंशोधित नगरपालिका सीवेज, विषाक्त औद्योगिक प्रदूषण, जन सामान्य द्वारा फैलाई गंदगी और नदी जल मार्ग में परिवर्तन आदि सभी संयुक्त रूप से नदियों को गैर-मानसून अवधि के दौरान अस्वस्थ तथा अवरुद्ध प्रदूषित इकाई के रूप में बदल कर रख देता है.

नदी के स्वास्थ्य को समझने का एक तरीका यह सोचना है कि नदी अपने सिस्टम को किस प्रकार समर्थन करती है ; अपने प्राकृतिक क्रियाकलापों को बनाए रखती है तथा समाज को संबंधित वस्तुएं और सेवाएं प्रदान करती है. नदी प्रणाली में कई प्रक्रियाएं शामिल हैं - जलविद्युत, भू-मोर्फोलॉजिकल व पर्यावरण स्थिरता, जल परिवहन, तलछट, पोषक तत्व एवं जलीय जीवन की गतिविधियों द्वारा पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखना, इन सभी के अतिरिक्त बहुत से लोगों का जीवन नदी जल पर ही आश्रित है.

 

पर्यावरणीय – प्रवाह :

पर्यावरणीय प्रवाह जैव विविधता को संरक्षित करता है और जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए आजीविका का समर्थन करता है. ई-फ्लो को "नदियों की पारिस्थितिक अखंडता, उनके संबंधित पारिस्थितिक तंत्र और उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के रखरखाव के लिए आवश्यक प्रवाह" के रूप में परिभाषित किया गया है. इस प्रकार  नदी में ई-फ्लो की अवधारणा एक बड़े लक्ष्य का सबसेट है ; मसलन, “एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन.”

अत्याधिक प्रदूषण, मौसम में अकाल्पनिक परिवर्तन, निरंतर बढ़ती पानी की मांग और मुख्य एवं सहायक नदी धाराओं में विभाजन व अवरुद्धता आदि ने नदियों के स्वास्थ्य का विनाश तथा नदी बेसिन में रहने वाले लाखों लोगों को पोषित करने की क्षमता को खत्म कर दिया है. नदी से जुड़े सभी प्रदूषण स्त्रोतों एवं प्रदूषण भारों का व्यापक लेखा होना आवश्यक है, जिससे स्वस्थ नदी के लिए वास्तविक एवं समयबद्ध प्रदूषण घटाव लक्ष्य निश्चित किये जा सके. इसीलिए जल गुणवत्ता और पर्यावरणीय प्रवाह लक्ष्यों से जुड़े नदी के स्वास्थ्य उद्देश्यों को स्पष्ट किया जाना चाहिए ताकि सरकार और हितधारक प्रगति को ट्रैक कर सकें और जल आवंटन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय प्रवाह के रखरखाव के लिए वैकल्पिक विकल्प के लिए परिदृश्यों का विश्लेषण कर सकें.

वर्तमान में नदी स्वास्थ्य से जुड़े उत्तरदायित्वों को सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक वार्षिक रिपोर्टिंग की प्रतिबद्धता की आवश्यकता है ;  और यह सार्वजानिक तर्क- वितर्क का विषय होना चाहिए कि प्रदूषण, तलछट एवं प्रवाह का मानक स्तर क्या और कितना होना चाहिए और मानव स्वास्थ्य, व्यावसायिक उत्पादन तथा कृषि आदि पर इससे पड़ने वाले प्रभावों का हर संभव आकलन भी जरूरी है. एक योजनाबद्ध रणनीतिक बेसिन नियोजन दृष्टिकोण के अनुकूलन से भारत नदियों की पर्यावरणीय अपकर्ष को दूर कर सकता है. भारत को उन उपायों से समाधान विकसित करने की आवश्यकता है, जो नदी के स्वास्थ्य से समझौता ना करते हों. इनमें हाइड्रोपावर विकास के लिए पर्यावरण प्रबंधन, बेहतर सिंचाई और कृषि प्रक्रियाओं के अंतर्गत सावधानीपूर्वक साइट चयन तथा टिकाऊ अंतर्देशीय नेविगेशन जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय और गतिविधियों का प्रारंभ होना जरूरी है.

उत्तर प्रदेश सरकार के विकास कार्यक्रम के तहत लखनऊ में गोमती नदी, मथुरा-वृंदावन में यमुना नदी,  वाराणसी में वरुणा नदी आदि नदियों को जैव विविधता में समृद्ध नदी प्रणालियों का प्रतीक माना गया है. सूखा प्रवण बुंदेलखंड क्षेत्र में टैंकों के अतिशय निर्माण का उद्देश्य समुदायों, अर्थव्यवस्थाओं और प्रकृति को दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्रदान करना है. प्रदूषित जल मानव उपभोग के लिए जल की उपलब्धता को कम कर देता है और जीवित प्राणियों के अस्तित्व को खतरे में डालकर एक गंभीर वैश्विक समस्या बन जाता है. हमारे देश के अधिकांश हिस्सों में भूजल निर्भरता का स्रोत है, जो गुणवत्ता की बाधाओं से परिपूर्ण है.

 

स्वच्छ नदी का संरचनात्मक स्वरुप –

हम अक्सर बाढ़ के दौरान एक शक्तिशाली नदी की कल्पना कर सकते हैं जो  गैर मानसून के दौरान एक मृतप्राय नदी में तब्दील हो जाती है, जो अपर्याप्त जल एवं जल की घटती गुणवत्ता और कुछ क्षेत्रों में जलीय जीवन के लिए घातक भी हो जाती है. परिस्थितियों में यह बड़ा अंतर नदी के स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट दर्शाता है. औद्योगिक जरूरतों के नाम पर बांध के पीछे जलाशय का निर्माण करके, सिंचाई के लिए नदी के मार्गों में जलाशयों का निर्माण करना, हाइड्रो पॉवर के लिए बैराज स्थापित करना और पेयजल आपूर्ति के लिए भूजल पृथक्करण से जलीय धारा संतुलन से छेड़छाड़ करना इत्यादि से नदी संरचनाओं में निरंतर परिवर्तन आ रहा है और नदियों का कुदरती प्रवाह घट रहा है.

आज बढ़ती आबादी की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए अतिक्रमण और नदी के जीवित रहने के लिए आवश्यक पारिस्थितिक पोषक संपोषण को भुलाया जाना स्वयं में ही विनाशकारी साबित हो रहा है. भारत के जीव- विज्ञान सर्वे के अनुसार गंगा नदी रोटिफायर या माइक्रोस्कोपिक जीवों की 104  प्रजातियों,  मछलियों की 378 प्रजातियों,  उभयचर की 11 नस्लों, सरीसृप की 27 किस्मों, 11 प्रकार के स्तनधारियों,  जलीय पक्षियों की 177 प्रजातियों को पोषण प्रदान करती है. लगभग 450 मिलियन आबादी और लाखों पौधे और जीव- जंतु गंगा और उसके आस-पास के वातावरण पर निर्भर करते हैं.

नदी ताजे पानी पर आश्रित प्रजातियों का घर है और नदी के तट वनस्पतियों और जैव विविधता के लिए आवास श्रृंखला के प्रदाता के रूप में कार्य करते हैं, परन्तु भारत की प्राचीन सभ्यता की प्रतीक एवं देश की समृद्धि का केंद्रीय बिंदु रही राष्ट्रीय नदी गंगा आज कुपोषित हो रही है. एक अनुमान के अनुसार तकरीबन 2,600 एमएलडी सीवेज पानी की सफाई में पिछले तीन दशकों (1995 से 2014-15) में 4,200 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं. इसके अतिरिक्त "नमामि गंगे कार्यक्रम" के लिए वर्ष 2019-20  तक 20,000 करोड़ रुपये के आबंटन के आदेश सरकार द्वारा दिए गये हैं.

 

पारिस्थितिक विज्ञान (अर्थ एवं प्रभाव) –

तकनीकी और आर्थिक दक्षता के प्रभाव में प्राकृतिक पर्यावरण पर मानव नियंत्रण की वृद्धि आज विकास और प्रगति का पर्याय बन गयी है. वहीँ दूसरी ओर, पारिस्थितिक विज्ञान,  विज्ञान की वह शाखा है जो जीवों के पारस्परिक संबंधों से और उनके आस पास के पर्यावरण से जुड़े कार्यों पर केन्द्रित है. वास्तव में पर्यावरण परिवेश, वातावरण, स्थिति, जलवायु, परिस्थितियों आदि का मिला जुला स्वरुप है.

जल
जीवन, पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं का प्रदाता है और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के
कार्यान्वयनकर्ता के र

दूसरे शब्दों में, पर्यावरण को "जीवों के विकास और जीवन को प्रभावित करने वाली सभी स्थितियों और प्रभावों के कुल योग" के रूप में परिभाषित किया गया है. व्यापक रूप से कहा जा सकता है कि पर्यावरण विज्ञान पृथ्वी पर उपस्थित सभी इकाइयों का अध्ययन है. जिसमें गैर-जीवित पदार्थ ;  जैसे मिट्टी और पानी और जैविक जीव जैसे सूक्ष्मजीव,  पौधे,  जानवर और मनुष्य, जीवित रहने और अपने  अस्तित्व की निरंतरता के लिए एक दूसरे पर निर्भर करते हैं. इसलिए पारिस्थितिकी जीवित जीवों का स्वयं और स्वयं के पर्यावरण के साथ संबंधों का व्यापक अध्ययन है. इस प्रकार  पारिस्थितिकी जीवों, आबादी, समुदायों आदि के विज्ञान से संबंधित है और यह कार्यात्मक प्रक्रियाएं नदियों, तालाबों, झीलों और भूमि जैसे प्राकृतिक आवास में सम्पन्न होती हैं.

इस प्रकार नदियों की भव्यता, उनकी अविरलता व निर्मलता को बनाए रखने के लिए एक आवश्यक प्रारूप के तौर पर पर्यावरण प्रवाह का वैज्ञानिक रूप से मूल्यांकन होना जरूरी है, साथ ही नदियों के स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण प्रवाह के आबंटन को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए. यह पवित्र नदी गंगा और उसकी सहायक नदियों की स्वास्थ्य प्रकृति को बनाए रखने के लिए जल आबंटित करने की व्यवस्था में नीतिगत बदलाव की मांग करता है.

 

समाज के लिए नदी- सेवाएं –

एक स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करती है, जो स्वस्थ जीवन, आजीविका और समग्र स्वास्थ्य के लिए परिस्थितियों और गतिशीलता को बनाए रखने में बेहद सहायक है. एक स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी तंत्र के सामूहिक क्रियाकलापों के द्वारा प्रदान किए गए कई लाभ समग्र रूप से सबकी समझ में नहीं आ पाने के कारण वें तर्कसंगत आबंटन के निर्णय में एकीकृत नहीं हैं, यहां तक कि नदी संरक्षण से संबंधित मौजूदा नीतियां और प्रथाएं वर्तमान में ताजे जल के पारिस्थितिक तंत्र द्वारा प्रदत्त व्यापक सेवाओं की अनदेखी करती हैं. नदियां समाज को भांति भांति की सेवाएं प्रदान कर असंख्य लाभ प्रदान कर देश के आर्थिक संसाधनों का विकास करती हैं, जिनमें से कुछ मुख्य अग्रलिखित हैं :-

 

पारिस्थितिक सेवाएं –

नदी तंत्र समाज को असंख्य लाभ प्रदान करता है, प्रावधान, विनियमन, समर्थन और सांस्कृतिक अवलोकन के माध्यम से नदियां समाज को केवल जीवन ही नहीं, अपितु जीवन का सार भी प्राप्त कराती हैं. अपने अनूठे पारिस्थितिक तंत्र और पर्यावरण प्रवाह के अंतर्गत सर्वप्रथम जीवन के लिए आवश्यक भोज्य पदार्थों के उत्पादन का प्रावधान नदियों के माध्यम से किया जाता है. जिसमें मत्स्य पालन, फसलें, औषधियां, पेयजल आदि पोषक वस्तुएं मनुष्य को प्राप्त होती हैं. जलवायु नियंत्रण के माध्यम से नदियां वर्षा की प्रक्रिया में सहायक बनकर भूजल रिचार्ज का स्त्रोत बनती हैं, साथ ही जलीय जीव- जंतु एवं पौधों के माध्यम से प्रदूषण पर भी कुदरती तौर पर नियंत्रण होता है. 

जल
जीवन, पारिस्थितिक तंत्र सेवाओं का प्रदाता है और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के
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कृषि विकास में सहायक –

भारत जैसे कृषि प्रधान देशों में जहां एक बेहतर कृषि व्यवस्था नदियों और मानसून पर निर्भर करती है, वहां सिंचाई का सबसे आवश्यक स्त्रोत नदियां, नहरें, तालाब इत्यादि हैं. सिंचाई व्यवस्था पर्याप्त मात्रा एवं गुणवत्ता के जल, तलछट प्रवाह और पोषक तत्व चक्र जैसे अन्य तत्वों पर निर्भर करती है. फसल पैदावार को प्रभावित करने वाले प्रमुख उपागमों में नदियां वाणिज्यिक सिंचाई रोजगार, कर राजस्व और खाद्य सुरक्षा के रूप में लाभ प्रदान कर सकती है.

 

व्यवसायिक लाभ –

पानी विनिर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है और इसका उपयोग व्यवसाय में लुब्रिकेशन, रंगाई, शीतलन और धुलाई आदि के उद्देश्यों के लिए भी किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सही समय और सही जगह पर तथा सही मात्रा में और सही कीमत पर पानी की एक स्थिर आपूर्ति की आवश्यकता होती है. इसके अतिरिक्त बिजली उत्पादन में नदियों की भूमिका सर्वाधिक अहम होती है, जिसके जरिये देश के व्यवसाय में सुगमता और साथ ही रोजगार सम्बन्धी संभावनाएं भी उत्पन्न होती हैं, जो किसी भी विकासशील देश की नींव है.

 

आजीविका संरक्षक के रूप में जल –

फ्रेश वाटर फिशरीज केवल पोषण के रूप में प्रोटीन का ही नहीं बल्कि आय का भी एक महत्वपूर्ण आर्थिक स्रोत हैं, विशेष रूप से देशों को विकसित करने में नदियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है. नदियां तटीय प्रदेशों में बाढ़कृत मैदानों के माध्यम से किसानों की आजीविका के प्रमुख स्त्रोत के रूप में उभरती हैं, साथ ही कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उत्पादन का एकमात्र स्त्रोत नदी- तालाब इत्यादि ही हैं, जिनके अभाव में एक बड़ी जनसंख्या का रोजगार प्रभावित होता है. नदियां पशुधन उपभोग के चरागाह क्षेत्रों के लिए जल की उपलब्धता कराते हैं तथा घरेलू खपत के लिए विभिन्न खाद्य पदार्थ, औषधीय पौधों की फसल, वनीय क्षेत्र से ईधन एवं स्थानीय निर्माण के लिए लकडियां प्रदान कराने में भी सहायक हैं.

 

स्वास्थ्य पोषक –

स्वस्थ ताजे पानी के पारिस्थितिक तंत्र, प्रदूषण तथा मानव व पशु अपशिष्ट के साथ-साथ जल जन्य या दूषित जल से संबंधित बीमारियों को कम करने के लिए अत्यंत अनिवार्य है.  खाना पकाने, पीने, स्नान करने और कपड़े धोने के लिए स्वच्छ पानी का उपयोग करने से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किए जाते हैं और पानी से उत्पन्न संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए ताजे, पोषक एवं स्वास्थ्यवर्धक जल का प्रयोग किया जाना जरूरी होता है.

 

सांस्कृतिक धरोहर के रूप में जल स्त्रोत –

नदियां केवल अर्थव्यवस्था को सुचारू रखने का एक उपागम ही नहीं, अपितु किसी भी देश की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत रखने में अग्रणी भूमिका का वहन करती हैं. नदियों के किनारे इतिहास पनपता है, बहुत सी सभ्यताएं विकसित होती हैं तथा धार्मिक सद्भावना को पोषण भी मिलता है. विशेष तौर पर भारत जैसे देश में नदियों को माँ के स्वरुप में देखा जाता है, कुंभ जैसे बड़े मेलों, उत्सवों, पर्वों आदि का आयोजन भी नदियों के किनारे किया जाता रहा है. जिसके चलते देश में धार्मिक टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलता है, साथ ही मानसिक शांति के अनोखे माध्यम के रूप में भी कलकलाती नदियों की तुलना अन्यत्र किसी भौतिक स्त्रोत से नहीं की जा सकती है.    

 

पारिस्थितिक तंत्र प्रबंधन के लिए नदी सूत्र -

1.  नदियां हमारी प्राकृतिक विरासत का हिस्सा हैं.

2.  जल, भू-आकृतियों और कुदरती-निवास प्रशासनिक सीमा का पालन नहीं करते.

3.  नदियां प्राकृतिक घटनाएं हैं तथा उन्हें पाइपलाइनों या नहरों से अलग-अलग दिशाओं में काटा नहीं जा सकते हैं.

4.  नदी कोई नाली नहीं है, इसीलिए नदियों को नालों से अलग करना ही होगा.

5.  बाढ़कृत पारिस्थितिक प्रणालियां हजारों-हजार सालों के बाद विकसित हुई हैं, जिस कारण उनका समग्र विकास करना अनिवार्य है.

6.  एक नदी, नदी बेसिन के हाइड्रोलॉजिकल एकता का एक अविभाज्य अंग है और लैंडस्केप घटक पानी और बाढ़ के मैदानों के प्रवाह के साथ जुड़े हुए हैं.

7.  भूजल गैर-मानसून मौसम में नदी के प्रवाह को विशेष रूप से बनाए रखता है.

8.  स्वस्थ सहायक नदियां एवं झील एक नदी के जीवन कार्यों को बनाए रखते हैं.

9. नदियों की पारिस्थितिक प्रणालियां मीठे पानी में से सबसे अधिक उत्पादक पारिस्थितिक प्रणालियों में से एक हैं - जीवों का उत्पादन और रक्षा करता है.

10.  नदियों का प्रवाह उन्हें जीवंत रखता है, यदि प्रवाह नहीं होता है, तो नदी केवल एक नाला भर है. प्रवाह नदी को स्वच्छ बनाता है.

 

जीवनदायिनी नदियों की रक्षा के लिए अब भी हम नहीं चेते तो हमारे जीवन पर संकट पैदा हो जाएगा, वर्तमान में ऐसी योजनाबद्ध नीति निर्माण की जरुरत है जिसमें प्रत्येक वर्ग यह महसूस कर सकें कि नदी की सेवा में उनकी भूमिका अहम है, नदी के विकास में धर्म- संप्रदाय का भेदभाव नहीं अपितु सभी वर्गों का सद्भाव होना चाहिए. 

नदियों के विकास की योजनाएं किसी व्यक्ति के निजी चिंतन पर आधारित नहीं हो सकती  बल्कि सामूहिक चिंतन का परिणाम होती है. अगर सुझाओं में कोई कमी या कठिनाई हो तो सबके सामने उसकी खुली बहस चले या फिर इन पर अमल करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाए. साथ ही सरकार पर शांतिपूर्ण तरीकों से दबाव डाल जाना चाहिए, ताकि नदियों के विकास पर ध्यान केन्द्रित किया जा सके. 

नदियां प्रकृतिदत्त उपहार हैं, जिनका विकास किये जाने की आवश्यकता है, ना कि विनाश. यदि अपनी अति भौतिकवादी प्रवृति से दूर हटकर आज भी हमने नदियों के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया, तो भविष्य अकल्पनीय हो सकता है. जल जीवन है और जल की महत्ता को योजनबद्ध तरीके से समय रहते नहीं समझा तो यह केवल विनाश का संकेत बन कर रह जाएगा.

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पानी की कहानी - वर्ल्ड वाटर डे विशेष : भूजल संरक्षण है आवश्यक

वर्तमान समय में प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव हमारे प्राकृतिक जल स्त्रोतों के लिए खतरा बनता जा रहा है। नीर फाउंडेशन के निदेशक व संस्थापक न...

पानी की कहानी - गंगा में रोजाना डंप किया जा रहा है 280 करोड़ लीटर अपशिष्ट, नियमों का उल्लंघन कर रही 190 औद्योगिक इकाइयों को केंद्र सरकार ने किया बंद

पानी की कहानी - गंगा में रोजाना डंप किया जा रहा है 280 करोड़ लीटर अपशिष्ट, नियमों का उल्लंघन कर रही 190 औद्योगिक इकाइयों को केंद्र सरकार ने किया बंद

गंगा नदी प्रदूषण में इजाफा कर रहे 180 उद्योगों पर सोमवार 21 मार्च को केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है। गंगा को प्रदूषित कर रहे पांच राज्यों के ...

आदि बद्रीबांध निर्माण को लेकर हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में हुआ समझौता - सरस्वती को मिलेगा पुनर्जीवन

आदि बद्रीबांध निर्माण को लेकर हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में हुआ समझौता - सरस्वती को मिलेगा पुनर्जीवन

वैदिककालीन साहित्य में परम पवित्र नदी के रूप में जानी जाने वाली सरस्वती नदी भारत की उन पौराणिक नदियों में से एक है, जिनके किनारे रहकर ऋषियों...

Raman River Rejuvenation Model

Raman River Rejuvenation Model

Raman River Rejuvenation Model WHY NEED THIS MODEL?The existence of small and rainy rivers in India is nearing its end. The new generation h...

पानी की कहानी - क्रिसमस डे के मौके पर मोहम्मदी क्षेत्र में विवेकानंद घाट पर चलाया गया स्वच्छता अभियान

पानी की कहानी - क्रिसमस डे के मौके पर मोहम्मदी क्षेत्र में विवेकानंद घाट पर चलाया गया स्वच्छता अभियान

सदानीरा रही गोमती हजारों वर्षों से अनेकों संस्कृतियों को सहेज रही है, कईं सभ्यताओं को पनपने में अपनी भूमिका प्रदान कर चुकी है, अनगिनत पौराणि...

हसदेव अरण्य कोयला खनन - उद्योग, आर्थिक विकास आवश्यक लेकिन क्या जीवनदायक जंगल, साफ पानी, ताजी हवा जरूरी नहीं

हसदेव अरण्य कोयला खनन - उद्योग, आर्थिक विकास आवश्यक लेकिन क्या जीवनदायक जंगल, साफ पानी, ताजी हवा जरूरी नहीं

"जब आखिरी पेड़ कट जाएगा, जब आखिरी नदी के पानी में जहर घुल जाएगा और जब आखिरी मछली का भी शिकार हो जाएगा, तभी इनसान को एहसास होगा कि वह पैसे नह...

पानी की कहानी - नीम नदी को पुनर्जीवन देने के भागीरथ प्रयास हुए शुरू

पानी की कहानी - नीम नदी को पुनर्जीवन देने के भागीरथ प्रयास हुए शुरू

नीम नदी को उसके उद्गम स्थल पर पुनर्जीवित करने के पुनीत कार्य का बीड़ा नीर फाउंडेशन ने उठाया है और प्रकृति व पर्यावरण की अनूठी धरोहर नदियों ओ ...

पानी की कहानी - नर्मदा निर्मलता से जुड़े कुछ विचारणीय सुझाव

पानी की कहानी - नर्मदा निर्मलता से जुड़े कुछ विचारणीय सुझाव

नीति पहले, कार्ययोजना बाद मेंकिसी भी कार्ययोजना के निर्माण से पहले नीति बनानी चाहिए। नीतिगत तथ्य, एक तरह से स्पष्ट मार्गदर्शी सिद्धांत होते ...

पानी की कहानी - हिंडन नदी : एक परिचय

पानी की कहानी - हिंडन नदी : एक परिचय

कालुवाला खोल अर्थात हिण्डन नदी सहारनपुर जनपद में शिवालिक की पहाडियो कालुवाला पास से प्रारम्भ होती है । यह बरसाती नदी है । इसमे छोटी अन्य सहा...

Exhibition and Workshop on Urban Water System in Gurgaon: Pathways to Sustainable Transformation

Exhibition and Workshop on Urban Water System in Gurgaon: Pathways to Sustainable Transformation Event

As we all knows that big cities change rapidly, people moving into them can struggle for access to basic services like clean water and san...

नेशनल वाटर कांफ्रेंस एवं "रजत की बूँदें" नेशनल अवार्ड ऑनलाइन वेबिनार 26 जुलाई 2020

नेशनल वाटर कांफ्रेंस एवं "रजत की बूँदें" नेशनल अवार्ड ऑनलाइन वेबिनार 26 जुलाई 2020 Event

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पानी की कहानी - लॉक डाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए जारी है यमुना नदी से अवैध खनन

पानी की कहानी - लॉक डाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए जारी है यमुना नदी से अवैध खनन

जहां एक ओर कोरोना और लॉक डाउन के चलते जनजीवन अस्त व्यस्त सा हो गया है और लोगों के सामने स्वस्थ रहते हुए आजीविका चलाना सबसे बड़ी वरीयता बनकर र...

Acute Encephalitis Syndrome Reduction through Promotion of Environmental Sanitation and Safe Drinking Water Practices

Acute Encephalitis Syndrome Reduction through Promotion of Environmental Sanitation and Safe Drinking Water Practices

Abstract: Water management and safe sanitation play an important role in controlling vector borne diseases in the tropical countries like...

पचनदा बांध परियोजना - डैम प्रोजेक्ट पूरा होने से बीहड़ांचल को मिलेगा धार्मिक महत्त्व, बनेगा पर्यटन केंद्र

पचनदा बांध परियोजना - डैम प्रोजेक्ट पूरा होने से बीहड़ांचल को मिलेगा धार्मिक महत्त्व, बनेगा पर्यटन केंद्र

भारत में नदियों का धार्मिक महत्त्व किसी से छिपा नहीं है, युगों से नदियों किनारे लगने वाले पौराणिक मेले, स्थापित मंदिर, मठ, आश्रम, तपस्थली आद...

पानी की कहानी - हिंडन को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एनजीटी ने शुरू किये प्रयास, पर्यावरण विशेषज्ञों ने जन सहभागिता को बताया अहम

पानी की कहानी - हिंडन को प्रदूषण मुक्त करने के लिए एनजीटी ने शुरू किये प्रयास, पर्यावरण विशेषज्ञों ने जन सहभागिता को बताया अहम

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने हिंडन नदी के साथ साथ काली नदी को भी स्वच्छ बनाने की कवायद शुरू की है. मेरठ में कमीश्नर के रूप में कार्य करते हुए...

मनियारी नदी - शहर भर के कचरे का डंपिंग स्टेशन बनती एक सदानीरा नदी की कहानी

मनियारी नदी - शहर भर के कचरे का डंपिंग स्टेशन बनती एक सदानीरा नदी की कहानी

"जल है तो कल है", जाने किंतनी बार हम सभी ने ये पंक्तियां सुनी हैं. गाहे-बगाहे पर्यावरण प्रेमी, जल संरक्षण संस्थाओं, सामाजिक-राजनीतिक व्यक्ति...

पानी की कहानी - कचरा डंपिंग ने भूगर्भीय जल को बना दिया विषैला, सरकार को नियम बनाने में लग गए 49 साल

पानी की कहानी - कचरा डंपिंग ने भूगर्भीय जल को बना दिया विषैला, सरकार को नियम बनाने में लग गए 49 साल

"घैला के पास से लिए गए पानी के नमूनों की जाँच करने पर उनमें लेड और क्रोमियम जैसे विषैले हैवी मेटल्स मिले हैं. साथ ही जिंक, कॉपर, आयरन, निकेल...

खारुन नदी - जहरीली होती जा रही है रायपुर की जीवन रेखा खारुन नदी, समय रहते संरक्षण जरुरी

खारुन नदी - जहरीली होती जा रही है रायपुर की जीवन रेखा खारुन नदी, समय रहते संरक्षण जरुरी

छत्तीसगढ़ के रायपुर में युगों से बहने वाली "खारुन नदी" शहर के लगभग 15 लाख लोगों के लिए जल और जीवन का स्त्रोत है. "रायपुर में "खारुन महतारी" क...

पहुज नदी - धीरे धीरे मर रही एक प्राचीन नदी की कहानी

पहुज नदी - धीरे धीरे मर रही एक प्राचीन नदी की कहानी

सनातनी धार्मिक ग्रन्थों में पुष्पावती के नाम से जानी जाने वाली "पहुज नदी" यमुना की सहायक काली सिंध नदी की सहायक मानी जाती है. बुंदेलखंड वासि...

कंडवा नदी – समाज और प्रशासन की अवहेलना झेल रही कंडवा की कब बदलेगी तस्वीर?

कंडवा नदी – समाज और प्रशासन की अवहेलना झेल रही कंडवा की कब बदलेगी तस्वीर?

लखीमपुर खीरी को छोटी काशी की उपाधि दी जाती है, जिसका सबसे बड़ा कारण यहां उपस्थित सरिताएं और उनके तटों पर सुशोभित मंदिर एवं आश्रम हैं. गोमती, ...

उल्ल नदी - औद्योगिक प्रदूषण, सीवेज और अवैध अतिक्रमण से जूझ रही है शारदा की यह सहायक

उल्ल नदी - औद्योगिक प्रदूषण, सीवेज और अवैध अतिक्रमण से जूझ रही है शारदा की यह सहायक

हिमालय की तलहटी में बसा पीलीभीत जिला अपनी सघन वन संपदा, जैविक विविधता और जल संग्रहण क्षेत्र के लिए जाना जाता है. दलदली भूमि होने के चलते यहा...

कठिना नदी - विभिन्न स्थानों पर सूख गयी है गोमती की यह प्रमुख सहायक

कठिना नदी - विभिन्न स्थानों पर सूख गयी है गोमती की यह प्रमुख सहायक

मानवीय शरीर में धमनियां रक्त संचरण करती हैं और हृदय को पोषित करते हुए समस्त शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाये रखने में अहम भूमिका निभाती ...

पानी की कहानी - बिहार जल प्रदूषण के बीच हर घर शुद्ध जल के सरकारी दावों की योजना

पानी की कहानी - बिहार जल प्रदूषण के बीच हर घर शुद्ध जल के सरकारी दावों की योजना

बिहार के उप मुख्यमन्त्री श्री सुशील कुमार मोदी ने हाल ही में इंडियन वाटर वर्कर्स एसोसिएशन के 52वें वार्षिक सम्मेलन के समापन समारोह को सम्बोध...

अरवरी नदी - सामुदायिक संकल्पों से पुनर्जीवित हुयी एक मृत नदी की कहानी

अरवरी नदी - सामुदायिक संकल्पों से पुनर्जीवित हुयी एक मृत नदी की कहानी

नदियां हमारे जनजीवन से जुड़ा वह अहम आधार हैं, जिनके बिना जीने की हम कल्पना भी नहीं कर सकते. सनातनी संस्कृति में नदियों को मां मानकर पूजे जाने...

पानी की कहानी - गंगा संरक्षण आवश्यक, फिर गंगा बेसिन की सहायकों, जलाशयों, भूगर्भीय जल स्त्रोतों की अनदेखी क्यों?

पानी की कहानी - गंगा संरक्षण आवश्यक, फिर गंगा बेसिन की सहायकों, जलाशयों, भूगर्भीय जल स्त्रोतों की अनदेखी क्यों?

भारत की आधी से अधिक जनसंख्या का पालन पोषण एक मां के समान करती है गंगा. प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष..हर देशवासी कहीं न कहीं इसी गंगत्त्व से जुड़...

पानी की कहानी - अटल भूजल योजना के जरिये घर घर पानी पहुँचाने का मोदी सरकार का मिशन

पानी की कहानी - अटल भूजल योजना के जरिये घर घर पानी पहुँचाने का मोदी सरकार का मिशन

पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म जयंती के अवसर पर सरकार ने उन्हें श्रृद्धा अर्पित करने के लिए दो अहम योजनाओं का प्रारम्भ कि...

पानी की कहानी - गाज़ियबाद में हिंडन को स्वच्छ करने का अभियान, नालों के पानी को साफ़ करने के लिए बनेगा ट्रीटमेंट प्लांट

पानी की कहानी - गाज़ियबाद में हिंडन को स्वच्छ करने का अभियान, नालों के पानी को साफ़ करने के लिए बनेगा ट्रीटमेंट प्लांट

हिंडन को प्रदुषण मुक्त बनाने के लिए गाज़ियाबाद नगर निगम नया सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की तैयारी कर रहा है. गौरतलब है कि गाज़ियाबाद में शहरी ...

दाहा नदी - लुप्त होने की कगार पर है सीवान जिले की जीवनरेखा, संरक्षण के प्रयास जरुरी

दाहा नदी - लुप्त होने की कगार पर है सीवान जिले की जीवनरेखा, संरक्षण के प्रयास जरुरी

विगत तीन दशकों से प्रदूषण की मार झेल रही बाणेश्वरी यानि दाहा नदी की कहानी भी देश की बहुत सी छोटी नदियों की ही तरह है, जो कभी अपनी अविरल प्रव...

फल्गु नदी - अतिक्रमण और प्रदूषण की मार झेल रही है आस्था की प्रतीक रही फल्गु नदी

फल्गु नदी - अतिक्रमण और प्रदूषण की मार झेल रही है आस्था की प्रतीक रही फल्गु नदी

ऐतिहासिक फल्गु नदी, जो हिन्दुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनकर पवित्र गया नगरी में बहती है, आज प्रदूषण और अतिक्रमण के चलते पूरी तरह सूख ...

भैंसी नदी -  विगत एक दशक से सूखी पड़ी है गोमती की यह सहायक

भैंसी नदी - विगत एक दशक से सूखी पड़ी है गोमती की यह सहायक

नदियां, जो महज पानी ढोने वाला मार्ग ही नहीं हैं, बल्कि इनके किनारे समस्त इतिहास, समग्र विरासत और तहजीब के किस्से समाये होते हैं. ऋग्वेद के अ...

प्रदूषण कर रहा है हमारे वायु, आहार और जल को विषाक्त - माइक्रोफारेस्ट बनाकर धरती को दे सकते हैं पुनर्जीवन

प्रदूषण कर रहा है हमारे वायु, आहार और जल को विषाक्त - माइक्रोफारेस्ट बनाकर धरती को दे सकते हैं पुनर्जीवन

प्रदूषित पर्यावरण दुनिया के लिए समस्या बनता जा रहा है। इससे निपटने के लिए सरकारें नई-नई पॉलिसी ला रही हैं। जिसमें पौधरोपण, सिंगल यूज्ड प्लास...

पानी की कहानी - मर रही हैं हमारी बारहमासी नदियां, पारिस्थितिक और सांस्कृतिक संवर्धन जरुरी

पानी की कहानी - मर रही हैं हमारी बारहमासी नदियां, पारिस्थितिक और सांस्कृतिक संवर्धन जरुरी

मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ अत्यधिक छेड़खानी ने भारत की हर नदी के प्राकृतिक परिदृश्य, उसके स्वरूप और प्रवाह को प्रभावित किया है। प...

प्राकृतिक जल स्त्रोतों के लिए धीमा जहर है प्लास्टिक – समय रहते बचाव जरुरी

प्राकृतिक जल स्त्रोतों के लिए धीमा जहर है प्लास्टिक – समय रहते बचाव जरुरी

तमाम विश्व आज प्लास्टिक की मार से कराह रहा है। अमेरिका जैसा विकसित देश हो या भारत जैसा विकासशील सभी प्लास्टिक के उपयोग से बढ़ने वाली दुश्वार...

पानी की कहानी - गाज़ियाबाद, गौतमबुद्धनगर और सहारनपुर जिले बना रहे हैं हिंडन को बीमार

पानी की कहानी - गाज़ियाबाद, गौतमबुद्धनगर और सहारनपुर जिले बना रहे हैं हिंडन को बीमार

जिन जिलों को वर्षों से हिंडन अपने जल, जैविक विविधता से पोषित करती आ रही थी, आज वही जिले हिंडन की बदहाली के जिम्मेदार बने हुए हैं. हाल ही में...

पानी की कहानी- मानक से अधिक हो रहा कीटनाशक का इस्तेमाल, नाले के जहरीले पानी से 25 भैंसो की मौत

पानी की कहानी- मानक से अधिक हो रहा कीटनाशक का इस्तेमाल, नाले के जहरीले पानी से 25 भैंसो की मौत

दूषित पानी का जहर सिर्फ मनुष्यों को ही बीमार नहीं कर रहा बल्कि अब जानवर भी इसके शिकार हो रहे हैं. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चिनहट औद्य...

पानी की कहानी- यमुना के पश्चिमी तट के बाद पूर्वी तट का होगा सौन्दर्यीकरण

पानी की कहानी- यमुना के पश्चिमी तट के बाद पूर्वी तट का होगा सौन्दर्यीकरण

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा यमुना नदी के पश्चिमी तट का सफलतापूर्वक कायाकल्प कर दिया गया है. प्राधिकरण ने नदी के पूर्वी तट के सौन्...

पानी की कहानी - गायब हो रहा है गोमुख ग्लेशियर, खतरे में गंगा का अस्तित्व

पानी की कहानी - गायब हो रहा है गोमुख ग्लेशियर, खतरे में गंगा का अस्तित्व

भारत की प्रमुख व पवित्रतम मानी जाने वाली गंगा नदी एक तरफ जहां प्रदूषण का विकराल दंश झेल रही है, वहीं दूसरी ओर इसकी जलधारा को स्त्रोत देने वा...

पानी की कहानी - मनरेगा फंड से होगा नदियों का पुनर्रूद्धार

पानी की कहानी - मनरेगा फंड से होगा नदियों का पुनर्रूद्धार

पवित्र नदियों में बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए केन्द्र सरकार के साथ ही उत्तर- प्रदेश सरकार द्वारा भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, हालांकि...

गगास नदी

गगास नदी

संक्षिप्त परिचय –उत्तराखण्ड की पहाड़ी नदियों में से एक गगास नदी राज्य में बहने वाली एक लघु जलधारा है. यह एक ऐसी नदी है, जिसका उद्गम दो स्थान...

विनोद नदी

विनोद नदी

संक्षिप्त परिचय –विनोद नदी उत्तर भारत की छोटी नदियों में से एक है. यह उत्तराखण्ड राज्य में प्रवाहित होती है. विनोद नदी एक पहाड़ी नदी है, जिस...

दामोदर नदी

दामोदर नदी

संक्षिप्त नदी –पश्चिमी भारत की नदियों में से एक दामोदर नदी एक छोटी जलधारा के रूप में बहती है. यह नदी मुख्यतः झारखंड व पश्चिम बंगाल राज्य के ...

सबरी नदी

सबरी नदी

संक्षिप्त परिचय –सबरी नदी दक्षिण – पश्चिमी भारत में बहने वाली प्रमुख नदियों में से एक है. नदी का उद्गम उड़ीसा राज्य में सिंकाराम की पहाड़ियो...

हसदो नदी

हसदो नदी

संक्षिप्त परिचय -हसदो नदी छत्तीसगढ़ राज्य में बहने वाली प्रमुख नदियों में से एक है. इसे ‘हसदेव’ नदी के नाम से भी जानते हैं. नदी का उद्गम कोर...

तवा नदी

तवा नदी

संक्षिप्त परिचय –तवा नदी मध्य- प्रदेश में बहने वाली सबसे छोटी नदियों में से एक है. नदी का उद्गम राज्य के होशंगाबाद जिले में पंचमढ़ी नामक स्थ...

ताम्रपर्णी नदी

ताम्रपर्णी नदी

संक्षिप्त परिचय –पश्चिम घाट से निकलने वाली ताम्रपर्णी नदी दक्षिण भारत में बहने वाली प्रमुख नदियों में से एक है. इसे ‘परूणै’ नाम से भी जानते ...

सुवर्णरेखा नदी

सुवर्णरेखा नदी

संक्षिप्त परिचय –भारत की सबसे रहस्यमयी नदियों में से एक सुवर्णरेखा नदी पश्चिमी भारत में बहने वाली एक प्रमुख नदी है. नदी का उद्गम झारखंड की र...

इन्द्रावती नदी

इन्द्रावती नदी

संक्षिप्त परिचय -उड़ीसा की जीवनरेखा के रूप में जानी जाने वाली इंद्रावती गोदावरी नदी की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है. यह मध्य- भारत में ब...

ब्रह्मपुत्र नद - संस्कृति और सभ्यता का संगम

ब्रह्मपुत्र नद - संस्कृति और सभ्यता का संगम

संक्षिप्त परिचय -संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक मानी जाने वाली ‘ब्रह्मपुत्र’ नद भारत की प्रमुख व पवित्रतम नदियों में से एक है. इस नद का उद्गम ...

बाणगंगा नदी

बाणगंगा नदी

संक्षिप्त परिचय –उत्तर- भारत में बहने वाली नदियों में से एक बाणगंगा नदी राजस्थान की एक प्रमुख नदी है, जो कि राजस्थान से लेकर उत्तर- प्रदेश र...

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जल पर संकट सम्पूर्ण मानव प्रजाति, वर्षों पुरानी सभ्यता एवं संस्कृति पर भी एक विकट संकट है. जल संकट की समस्या को लेकर विभिन्न प्रकृति प्रेमी, पर्यावरणविद एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता समस्याओं की जड़ तक जाकर उनके उचित समाधानों को खोजने और ज़मीनी स्तर पर उनके क्रियान्वन को दस्तावेज़ित करने का प्रयास इस पोर्टल के माध्यम से कर रहे हैं. कृपया हमसें जुड़े एवं प्रासंगिक अपडेट प्राप्त करने हेतु अपना नाम और ईमेल भरें. 

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