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मनियारी नदी - शहर भर के कचरे का डंपिंग स्टेशन बनती एक सदानीरा नदी की कहानी

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  • March-04-2020
"जल है तो कल है", जाने किंतनी बार हम सभी ने ये पंक्तियां सुनी हैं. गाहे-बगाहे पर्यावरण प्रेमी, जल संरक्षण संस्थाओं, सामाजिक-राजनीतिक व्यक्तियों या सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं आदि के जरिये हम सभी "जल है तो कल है" वाली उक्ति सुनते ही रहते हैं लेकिन इसे गुनने का प्रयास हम कभी नहीं करते हैं. अगर करते होते तो शायद हमारी नदियां आज स्वच्छ और अविरल होती, अपने घर की तरह हम सभी में अपनी नदियों को साफ़ सुथरा रखने की समझ होती और सबसे बड़ी बात कि हमारे चुने गए प्रतिनिधियों व सरकारों के अंदर नदियों के व्यवस्थित प्रबंधन की ललक होती...क्योंकि जल है तो कल है.

आज नदियां व्यथित हैं, कूड़ा-कचरा, सीवरेज, मानवीय अपशिष्ट सभी धडल्ले से नदियों में बहाया जा रहा है और फिर उन्हें स्वच्छ करने के नाम पर करोड़ों रुपयों की परियोजनाएं बनाकर दिखावा किया जाना आज जैसे प्रचलन हो गया है. देश की बड़ी नदियों की भांति ही छोटी नदियों का हाल भी बेहाल है. ऐसी ही एक नदी है छत्तीसगढ़ की "मनियारी नदी", जो वर्ष भर प्रवाहित होने वाली एक सदानीरा नदी है और आज आमजन व प्रशासन की अवहेलना झेल रही है. आइये चलते हैं मनियारी के सफ़र पर और जानते हैं इसकी कहानी...

मनियारी नदी का सफ़र

छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी पठार में सिंहावल की पहाड़ियों से निकलती है मनियारी नदी, जो लगभग 134 किमी की यात्रा करती है. मनियारी की सहायक नदियां आगर, घोंघा, टेसुआ, छोटी नर्मदा और गेंगुआ है, जो इसके जल प्रवाह को आगे बढ़ाने में सहायक हैं. इसके किनारे घानाघाट, दरवाजा, कंसरी, लाखासार, उरईकछार, डोंगरिया आदि दर्जनों गांवों के लिए मनियारी केवल जल स्त्रोत ही नहीं अपितु जीविका का आधार भी है.

मनियारी नदी पर खुडिया बांध बनाया गया है, जो तीनो ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है और पर्यटकों के लिए दर्शनीय स्थल है. इसे मनियारी जलाशय भी कहा जाता है. खुडिया से निकलने के बाद बहुत से गांवों को सींचते हुए मनियारी दक्षिण पूर्वी भाग में बिलासपुर और मुंगेली तहसील की सीमा बनाती है. अंततः यह बिलासपुर जिले के अमेरिकांपा तालागांव के निकट शिवनाथ नदी में समाहित हो जाती है.

शहरी कचरे के कारण प्रदूषित हो रही है मनियारी

जहां एक ओर गंगा, यमुना जैसी प्रमुख और बड़ी नदियों को संरक्षित करने के दावे सरकार द्वारा किये जाती हैं, वहीं दूसरी ओर इन छोटी किन्तु जनजीवन की प्रदाता मनियारी जैसी नदियों की अवहेलना करना भी जारी है. शहर भर के कचरे का डंपिंग स्टेशन बन चुकी मनियारी जैसे ही नगर की सरहदों से बाहर निकलती है, इसमें नगरीय क्षेत्र के ही मांस विक्रेता मांस अपशिष्ट बहा देते हैं, जिससे नदी का जल तो प्रदूषित होता ही है और नदी के तटों के दूषित होने से बीमारियां फैलने का खतरा भी बना रहता है.

आवश्यकता से अधिक किया जा रहा है जल दोहन

आज जब देश भर में भूजल के साथ साथ नदियों का जलस्तर घटना भी तेजी से जारी है और नदियों के बहाव को सुनिश्चित करना एक चुनौती बन गया है, ऐसे में मनियारी नदी जैसी बारहमासी नदियों के जल दोहन को लेकर किसी भी तरह का कानून राज्य सरकार द्वारा पारित नहीं किया जाना चिंता का विषय है.

नदी के किनारे लगे गांव तेजी से नदी के पानी का दोहन कर रहे हैं. नदी में पंप लगाकर सब्जियों को सींचने में और कृषि के अन्य कार्यों में पानी का दोहन जारी है. बता दें कि बीते कुछ वर्षों से छत्तीसगढ़ में बारिश कम हुयी है, ऐसे में यह स्थिति चिंताजनक है.

रेत घाटों का भी हो रहा है अवैध खनन

मनियारी के साथ साथ शिवनाथ नदी में भी विभिन्न स्थानों पर रेतीले घाटों पर अवैध उत्खनन किया जा रहा है. जिससे इन नदियों की स्थिति बिगड़ रही है. वर्ष 2017 से छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में अप्रत्याशित वर्षा नहीं हुयी, जिसके कारण मनियारी किनारों से सूख गयी. इस स्थिति का लाभ उठाकर खनिज माफियाओं ने मनियारी के खम्हारडीह ताला, एनीकट, सल्फा घाट जैसे किनारों से रेत का खनन करना शुरू कर दिया.

घाटों पर पोकलेन मशीनों से खुदाई कर रेत का व्यापार धड़ल्ले से किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन को इससे लेना देना नहीं है. हालांकि ग्रामीणों ने इसके खिलाफ विभाग में शिकायत दर्ज करायी है लेकिन इससे नतीजे विपरीत ही निकलते हैं क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार अधिकारी खुद रेत माफियाओं के साथ मिले हुए हैं, जिसका खामियाजा शिकायतकर्ता को ही उठाना पड़ता है. नदी में लगातार हो रहे अवैध उत्खनन के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरुप व बहाव दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं.

ईंटों को बनाने में भारी मात्रा में उपयोग हो रहा है नदी जल

मनियारी नदी को लेकर जिला प्रशासन, नगर पंचायत प्रशासन और आमजन के मध्य सजगता नहीं होने से इसके जल का दोहन लगातार जारी है. क्षेत्र में बहुत से ईंटों के भट्ठे स्थित हैं, जहां ईंटें बनाने में मनियारी के पानी का बड़ी मात्रा में दोहन किया जाता है. इसके लिए किसी भी प्रकार के नियम नहीं बनाये गए हैं, इसलिए भट्ठा मालिक किसी तरह की अनुमति नहीं लेते हैं. नतीजतन नदी का जलस्तर घटना जारी है.

नगर पंचायत मुंगेली, जिसे अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए जाना जाता है और देश के मानचित्र पर पर्यटन के लिहाज से इस स्थान का महत्व काफी अधिक है, सोचिये ऐसे स्थान पर एक बारहमासी नदी का दम तोड़ देना कितना भयावह और दुखद होगा. इसलिए बेहद जरुरी है कि नदी के संरक्षण के लिए हरसंभव जरुरी कदम उठाये जाये, पानी के उपयोग को लेकर नियमावली बनें, अवैध खनन पर रोक लगे और जनता को नदी को सहेजने की दिशा में जागरूक किया जाए.

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