पानी की कहानी - गंगा नदी
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- Pani ki Kahani
- July-22-2019
पतित पावनी गंगा नदी जिसकी मां के रूप में पूजा की जाती है, देवी के रूप में आरती की जाती है, एक ऐसी नदी है जिसकी धाराओं को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता. एक ऐसी नदी जो हजारों वर्षों से भारत की धरती पर बहती आ रही है. एक ऐसी नदी जिसमें स्नान मात्र शरीर के रोग दूर हो जाते हैं. जिसमें एक डुबकी लगा लेने से सारे पाप धुल जाते हैं और मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं. एक ऐसी नदी जिसके इतिहास को कुरेदते हुए में आप जितनी गहराई में जाएंगे, इसके दैवीय और चमत्कारिक स्वरूप में उतना ही डूबते चले जाएंगे. ये नदी जिस स्थान से भी होकर गुजरती है, वह तीर्थ बन जाता है और नदी का जल जिस वस्तु पर भी पड़ता है, वह पवित्र हो जाती है.
ऐसी दिव्य, दैवीय, जीवन और मोक्षदायिनी नदी के बारे में विस्तृत जानकारी इस प्रकार है -
संक्षिप्त परिचय –
भारत में बहने वाली सबसे लम्बी नदी के रूप में जाने जानी वाली पवित्र गंगा नदी देश की प्रमुख ऐतिहासिक नदी है. भागीरथी के नाम से प्रसिद्ध इस नदी का उद्गम दक्षिणी हिमालय के गोमुख से माना जाता है. जहां से निकलकर देश के विभिन्न राज्यों से होते हुए 2,525 कि.मी. का सफर तय करते हुए गंगा नदी बंगाल की खाड़ी में जाकर समुद्र में मिल जाती है. जल के रूप में जीवन प्रवाहित करने वाली गंगा नदी की उपस्थिति हर प्रकार से भारत की धरती को सुखद व समृद्ध बनाती है. भारत देश को अपने आंचल में पालने- पोषने (सिंचित करने वाली) इस नदी को यहां के लोगों द्वारा ‘गंगा मैया’ कहकर संबोधित किया जाता है.
ऐतिहासिक महत्व –
